Thursday, 23 November 2017

नोटबंदी

साठ साल है झेला साथी कुछ दिन और सह लेंगे 
आतंकवाद मिटाने को बिना नोट भी रह लेंगे

बलिदान है रक्त में अपने देश की ख़ातिर सह लेंगे 
नक्सलवाद मिटाने की ख़ातिर बिना नोट भी रह लेंगे

धन कुबेर क्या बनना साथी ख़ुद को ग़रीब कह लेंगे 
काला धन मिटाने को साथी बिना नोट भी रह लेंगे

ऐश मौज़ क्या करना साथी फ़कीरी में ही लह लेंगे 
भ्रस्टाचारियों के मर्दन को बिना नोट भी रह लेंगे

देशभक्ति सिर्फ़ शब्द नहीं ह्रदय में हम गह लेंगे 
माँ भारती की रक्षा हेतु बिना नोट भी रह लेंगे !

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