Tuesday, 21 November 2017

अनुराग

करने को पूरे अरमान, अपनों के मन के,
हमारी जिंदगी में आये, तुम बहार बन के !
नेमत तुम पितरो की, तुम ईश्वर का वरदान,
हर मुस्कान पे तेरी, जन्नत की खुशियां कुर्बान !
है दुआ ये मेरे दिल की, जन्मदिवस पे तेरे,
ग़म की न बदरी छायें कभी, बरसे सुख घनेरे !
आकाशगंगा में जब तक सितारे रहें,
प्रेम अनुराग से भरी तेरी जिंदगानी रहे !

No comments:

Post a Comment

सालगिरह

सोचता हूँ तेरे सालगिरह पर क्या नायाब लिक्खूँ तुझको कली कहूँ या फ़िर खिलता ग़ुलाब लिक्खूँ इश्क़ की सुनहरी राह और तुझसा हसीन साथी तुझे मल्लि...