Friday, 31 August 2018

अटल

तू कल था, तू आज है, तू कल रहेगा !
तू अटल था, तू अटल है, तू अटल रहेगा !

यूँ तो कई आये, कई आएंगे, राजनीती करने वाले,

पर संविधान की गरिमा में, तू अचल रहेगा !

सम्बोधनों और सभाओं में भाषा मर्यादा खो रही,

पर संसद हो या सड़क, तू कवि निश्छल रहेगा !

दल बदल के दल दल में, डूबते जाते सत्ता मोही,

घर घर कमल का फूल खिला, तू एक दल रहेगा !

देशभक्त कहलाने को, कई झूठी कस्मे खाएंगे,

पर माँ भारती के दिल में, तू हर पल रहेगा !

तू कल था, तू आज है, तू कल रहेगा !

तू अटल था, तू अटल है, तू अटल रहेगा !

- आशुतोष के श्रद्धा सुमन

सालगिरह

सोचता हूँ तेरे सालगिरह पर क्या नायाब लिक्खूँ तुझको कली कहूँ या फ़िर खिलता ग़ुलाब लिक्खूँ इश्क़ की सुनहरी राह और तुझसा हसीन साथी तुझे मल्लि...