मेरे राम तुम, मेरे श्याम तुम, ओ गुरुवर मेरे
तरस गयीं अँखियाँ दरस को तेरे, ओ गुरुवर मेरे
मेरे राम तुम, मेरे श्याम तुम, ओ गुरुवर मेरे
तरस गयीं अँखियाँ दरस को तेरे, ओ गुरुवर मेरे
साँसों की माला पे करता रहूँ मैं तेरा सुमिरन
तेरे ही चरणों में लगा रहे ये मेरा मन
साँसों की माला पे करता रहूँ मैं तेरा सुमिरन
तेरे ही चरणों में लगा रहे ये मेरा मन
मेरे राम तुम, मेरे श्याम तुम, ओ गुरुवर मेरे
तरस गयीं अँखियाँ दरस को तेरे, ओ गुरुवर मेरे
ब्रह्म ज्ञान का रस तूने सबको पिलाया
भटकते जीवों को शिव से तूने मिलाया
ब्रह्म ज्ञान का रस तूने सबको पिलाया
भटकते जीवों को शिव से तूने मिलाया
मेरे राम तुम, मेरे श्याम तुम, ओ गुरुवर मेरे
तरस गयीं अँखियाँ दरस को तेरे, ओ गुरुवर मेरे
ओ गुरुवर मेरे,
ओ गुरुवर मेरे
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सालगिरह
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परतंत्रता के हाथों कई बार राजतंत्र बिकी है, स्वतंत्रता की ईमारत शहीदों के शीश पे टिकी हैं! भ्रस्टाचार, जातिवाद, आरक्षण से देश लुट रहा है...
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लगता है दौर-ऐ-शियासत ने नयी राह चुनी है वरना शेर ने कब कुत्तों की सुनी है ! ये कोई क्रिकेट की पिच नहीं जंग-ए-शियासत है गुरु, ...
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क्या कुछ पाया, कितना कुछ खोये सोच कर नए साल पर बहुत रोये रोज निकलते थे और कही खो जाते थे रात में थकन को ओढ़ सो जाते थे ...
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