Tuesday, 9 April 2019

होली

यहाँ तक आनेवाली हर रस्ते को सलाम,
साथ निभाने वाली हर दस्ते को सलाम !

ये साक़ी तेरे मयख़ाने को सलाम,
जाम से भरे हर पैमानें को सलाम !

जनम जनम से प्यासी है ये रिंदो की टोली,
ये साक़ी अंगूर के रस में मिला के ला भाँग की गोली !

ख़ाली न जाये तेरे महफ़िल से कोई भी साक़ी,
पिलाता रह जब तक एक क़तरा भी है बाक़ी !

नस नस में हो इक तहलका सा,

कदम भी लड़खड़ाये हल्का सा!

  
ग़म की बीती यादों को मारो गोली,
मायूसी छोड़ो, जो हो ली सो हो ली !



बहार

बादलों पर चलकर सात समंदर पार आई है,
मुद्दतों बाद इस आँगन में  बहार आई है!

बागों में सिर्फ गुलों के मेले नहीं आये,
रंग बिरंगे  पक्षियों  की  कतार  आई  है!
हवा में बस खुशबू के रेले नहीं आये,
पेड़ों  पे जवानी फिर एक बार आई  है!

उन ठिठुरती रातों के दिन अब गए,
धूप  की  नयी  चादर  दो  चार  आई  है!
सिर्फ अरमानो का सूरज ही नहीं आया,
हौसलों की बारिश मूसलाधार आई  है!

-आशुतोष

सालगिरह

सोचता हूँ तेरे सालगिरह पर क्या नायाब लिक्खूँ तुझको कली कहूँ या फ़िर खिलता ग़ुलाब लिक्खूँ इश्क़ की सुनहरी राह और तुझसा हसीन साथी तुझे मल्लि...